भविष्य के गर्व में क्या रखा ये तो स्वयं नारायण को नहीं पता था ; हम तो फिर भी मनुष्य है ।।
इसलिए भविष्य की चिन्ता न कर हमे वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए;
वर्तमान में कर्मों का निर्वहन करें ।।
इसलिए भविष्य की चिन्ता न कर हमे वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए;
वर्तमान में कर्मों का निर्वहन करें ।।
महाभारत के युद्ध में, बदली जीवन की दीवार।
शकुनि की कपट योजना, कौरवों का क्रूर प्रयास,
द्रौपदी को अपमानित करने की उनकी आस।
यदि वस्त्र नहीं, तो क्या था विशेष उपहार,
द्रौपदी के स्वयंवर में, जिसने बदला इतिहास।
पांच पांडवों की पत्नी, शक्ति का प्रतीक थी वह,
वस्त्र के पीछे छिपे, असीम शक्तियों का रहस्य था जो खुला।
कौरवों की हानि, उनकी हार की नींद में,
द्रौपदी के अपमान का, राग भरा स्थान।
कृष्णा की मदद से, वस्त्रों का अद्वितीय जादू,
द्रौपदी की अपमान को, किया अपनी शक्ति का परित्याग।
वस्त्रहरण की कथा, सिखाती है हमें शिक्षा,
स्त्री की महत्वपूर्णता, और उसकी शक्ति की मान्यता।
द्रौपदी की अद्भुत कहानी, हमें दिखाती है राह,
सहसा न झुकने वाली, शक्ति, विजय और सफलता की आशा।